15 January 2014

ज़िन्दा हैं तो प्याला पुरा भर ले

ज़िन्दा हैं तो प्याला पुरा भर ले
कंचा फूटे चूरा कांच कर ले
ज़िन्दगी का ये घड़ा ले
एक सांस में चढ़ा ले
हिचकियों में क्या है मरना
पूरा मर ले...

कोयला काला है
चट्टानों पे पाला
अन्दर काला बाहर काला
पर सच्चा है साला
ज़िन्दा हैं तो प्याला पुरा भर ले
कंचा फूटे चूरा कांच कर ले
कंचा फूटे चूरा कांच कर ले
उलझे क्यूँ पैरों में ये ख़्वाब
क़दमों से रेशम खींच दे
पीछे कुछ ना आगे का हिसाब
इस पल की क्यारी सींच दे

आग जुबां पे रख दे
फिर चोट के होठ भिगायेंगे
घाव गुनगुनायेंगे
तेरे दर्द गीत बन जायेंगे 

ज़िन्दा हैं तो प्याला पुरा भर ले
कंचा फूटे चूरा कांच कर ले
ज़िन्दगी का ये घड़ा ले
एक सांस में चढ़ा ले
हिचकियों में क्या है मरना
पूरा मर ले...

This is the lyrics I liked most in 2013 which sung beautifully by Son of shankar Mahadevan ..


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